बसना(जीतयादव)।कंचनपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर सड़क की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है। कंचनपुर से पिपरौद, कंचनपुर से पंडरीपानी, पंडरीपानी से बारिकपाली, कंचनपुर से धरमपुर एवं कंचनपुर से पौसराडिपा (वन कक्ष क्रमांक 256 पिपरौद एवं 287 कंचनपुर) तक की सड़क वर्षों से बदहाल स्थिति में है।
प्रधानमंत्री सड़क योजना का लाभ आखिर कब मिलेगा? ग्रामीणों ने उठाए सवाल।
ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से जिला कलेक्टर, फॉरेस्ट विभाग के अधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। गांव में कार्यक्रमों के दौरान भी जनप्रतिनिधियों को जर्जर मार्ग की समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।
एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंच पाती
ग्रामीणों के अनुसार हालत इतनी खराब है कि शासकीय एंबुलेंस समय पर गांव तक नहीं पहुंच पाती। अचानक तबीयत खराब होने या गर्भवती महिलाओं की डिलवरी के समय घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे मरीज की हालत गंभीर हो जाती है।कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सड़क की बदहाली उनके लिए जीवन-मरण का सवाल बन चुकी है।
बच्चों की पढ़ाई पर असर
कंचनपुर से सांकरा 14 किलोमीटर और पंडरीपानी से सांकरा 16 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। बच्चे हाईस्कूल सांकरा और कॉलेज पिथौरा पढ़ने जाते हैं, लेकिन खराब सड़क के कारण कई पालक अपने बच्चों की पढ़ाई छुड़वाने को मजबूर हो रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सड़क बन जाए तो क्षेत्र का विकास होगा और बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर बेहतर भविष्य बना सकेंगे।
2023 में सौंपा गया था ज्ञापन
साल 2023 में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने महासमुंद कलेक्ट्रेट पहुंचकर तत्कालीन कलेक्टर श्री नीलेश कुमार क्षीरसागर को ज्ञापन सौंपा था। उनके निर्देश पर सड़क का नाप इंजीनियर द्वारा किया गया और वन विभाग ने 80 लाख रुपये का स्टिमेट भी तैयार किया।लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
वर्तमान कलेक्टर से फिर जगी उम्मीद
ग्रामीणों और पूर्व सरपंच राजेश साव ने वर्तमान जिला कलेक्टर श्री विनय कुमार लहंगे को जर्जर मार्ग की समस्या से अवगत कराया। कलेक्टर ने कहा कि स्टिमेट की स्थिति जांची जाएगी। यदि राशि कम होगी तो स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ कराया जाएगा, और यदि अधिक होगी तो राज्य स्तर से सहायता मांगी जाएगी।इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों में एक बार फिर उम्मीद जगी है।
ग्रामीणों के सवाल
आखिर सड़क बनेगी तो कब?
क्या प्रधानमंत्री सड़क योजना का लाभ मिलेगा?
क्या गर्भवती महिलाएं समय पर अस्पताल पहुंच पाएंगी?
क्या बच्चों की पढ़ाई ऐसे ही प्रभावित होती रहेगी?
क्या शासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
आजादी के 77 वर्ष बाद भी कंचनपुर और आसपास के हजारों ग्रामीण गड्ढों से भरी सड़क पर जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर हैं।अब पूरा क्षेत्र प्रशासन और सरकार की ओर देख रहा है — क्या इस बार ग्रामीणों का सपना सच होगा?






