वंदे मातरम् गीत की 150वीं वर्षगांठ पर करनापाली स्कूल में भव्य आयोजन
बसना। आज दिनांक 7 नवंबर 2025 को विकासखंड बसना के शासकीय प्राथमिक शाला करनापाली में राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” के 150वें वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय प्रार्थना सभा में साउंड सिस्टम के साथ पूर्ण वंदे मातरम् गीत के सामूहिक गान से हुई।

इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने विशेष वेशभूषा धारण की — छात्राएँ मां भारती के रूप में सजीं, वहीं छात्र कृषक के परिधान में नजर आए, जो आकर्षण का केंद्र बना।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वंदे मातरम् गीत पर विशेष उद्बोधन को स्मार्ट टीवी के माध्यम से देखा और सुना। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि “हर गीत में एक संदेश होता है, और वंदे मातरम् गीत में राष्ट्रीय एकता, मातृभूमि के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना निहित है।”

विद्यालय के प्रधानपाठक गिरधारी साहू ने अपने संबोधन में इस गीत के उद्गम और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1875 में महान देशभक्त बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास “आनंदमठ” में “वंदे मातरम्” की रचना की थी। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्तों में जोश, साहस और एकता की भावना जगाता रहा।
उन्होंने गीत की अमर पंक्तियाँ भी सुनाईं —
“वंदे मातरम्! सुजलाम्, सुफलाम्, मलयजशीतलाम्, शस्यशामलाम् मातरम्!”
इन पंक्तियों में भारतीय धरती की सुंदरता, समृद्धि और मातृभूमि के प्रति गहन श्रद्धा झलकती है।
150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा में —
1875: बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचना
1905: बंग-भंग आंदोलन में स्वतंत्रता का नारा बना
1937: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी
1947: स्वतंत्र भारत में “वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला
2025: 150वीं वर्षगांठ — राष्ट्रभक्ति और एकता का प्रतीक वर्ष

कार्यक्रम में शिक्षक वीरेन्द्र कुमार कर ने कहा —
“वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान और एकता का प्रतीक है।”
वहीं शिक्षिका निर्मला नायक ने विद्यार्थियों को इस गीत का अर्थ और उसका राष्ट्रीय महत्व विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, विद्यार्थी एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



