बसना(जीतयादव)।पिपरौद एवं कंचनपुर वन कक्ष क्रमांक 287 क्षेत्र की जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से जिला कलेक्टर, फॉरेस्ट विभाग के अधिकारियों और क्षेत्रीय विधायक व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपते आ रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
पिथौरा वन क्षेत्र की जर्जर सड़क से ग्रामीण परेशान, वर्षों बाद भी नहीं हुआ निर्माण।
ग्रामीणों के अनुसार खराब मार्ग के कारण शासकीय एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती। अचानक तबीयत खराब होने या गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के समय घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। अधिकांश ग्रामीण गरीब परिवार से हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में भारी कठिनाई झेल रहे हैं।
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शिक्षा भी इस जर्जर सड़क की भेंट चढ़ रही है। कंचनपुर से सांकरा की दूरी 14 किलोमीटर और पंडरीपानी से सांकरा 16 किलोमीटर तय करनी पड़ती है। बच्चे शासकीय हाईस्कूल सांकरा और कॉलेज पिथौरा जाने के लिए इसी वन मार्ग का उपयोग करते हैं। कई पालक परेशान होकर बच्चों की पढ़ाई बंद कराने को मजबूर हैं।

वर्ष 2023 में ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने महासमुंद कलेक्ट्रेट पहुंचकर तत्कालीन कलेक्टर नीलेश कुमार क्षीरसागर को ज्ञापन सौंपा था। सड़क की नाप-जोख भी हुई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। वर्तमान कलेक्टर विनय कुमार लहंगे ने कहा है कि स्टिमेट तैयार होने पर स्वीकृति दी जाएगी या आवश्यकता पड़ने पर राज्य से सहायता मांगी जाएगी।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब अन्य वन क्षेत्रों में प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सड़क बन सकती है तो उनके साथ भेदभाव क्यों? वर्ष 2021 में पूर्व सरपंच राजेश साव के कार्यकाल में 80 लाख रुपये का स्टिमेट तैयार हुआ था, जो कागजों तक सीमित रह गया।
अब क्षेत्र की जनता प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठी है—क्या सड़क निर्माण का सपना साकार होगा या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?




