बसना(जीतयादव)।रायपुर में FLN (Foundational Literacy and Numeracy) आधारित नवीन पाठ्यपुस्तकों पर पांच दिवसीय सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महासमुंद जिले के DRG (डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स ग्रुप) के शिक्षकों ने भाग लिया। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा को अधिक प्रभावी और गतिविधि आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।
FLN नई शिक्षा नीति के तहत गतिविधि आधारित शिक्षण और नई पाठ्यपुस्तकों पर दिया गया विशेष प्रशिक्षण।
यह प्रशिक्षण 27 से 31 मार्च 2026 तक SCERT के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ऋतुराज रघुवंशी और एफएलएन प्रभारी शबनम के निर्देशन में शिक्षकों को नई शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार की गई नई पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण पद्धति की जानकारी दी गई।

FLN प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञों ने शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण, “लर्निंग बाय डूइंग” और अनुभवात्मक अधिगम की अवधारणा पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। इसमें बताया गया कि बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने से उनकी समझ, संचार कौशल, आलोचनात्मक चिंतन और कल्पनाशीलता का बेहतर विकास संभव है।
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प्रशिक्षण में महासमुंद जिले से शीला बिस्वास, गीता साहू, दुलारी चंद्राकर, रिंकल बग्गा और शरण दास ने जिले का प्रतिनिधित्व किया। इन शिक्षकों ने प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाई और अब वे अपने-अपने क्षेत्रों में अन्य शिक्षकों को भी इस नई शिक्षण पद्धति के बारे में प्रशिक्षित करेंगे।
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प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करना है। इसके लिए NCERT और SCERT के सहयोग से कक्षा पहली से चौथी तक की पाठ्यपुस्तकों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन परिवर्तनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर वर्ष 2027 तक सभी बच्चों को उनकी कक्षा के स्तर के अनुसार पढ़ने-लिखने और गणना करने में सक्षम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।



