बसना(जीतयादव)।महासमुंद जिले के जमदरहा जोन के शिक्षकों का पांच दिवसीय एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) प्रशिक्षण कार्यक्रम जमदरहा में आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु संचालित है, जिसका मुख्य उद्देश्य कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों में पढ़ने, लिखने एवं गणितीय कौशलों की मजबूत नींव तैयार करना है।
एफएलएन प्रशिक्षण के तहत जमदरहा जोन के शिक्षकों का पांच दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तृतीय दिवस का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस दौरान मास्टर ट्रेनरों द्वारा एफएलएन के चार प्रमुख ब्लॉकों—पठन, लेखन, संख्यात्मक दक्षता एवं भाषा कौशल—को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक रूप से विस्तार से समझाया गया।

मास्टर ट्रेनर सालिक राम टंडन ने पठन ब्लॉक के अंतर्गत ध्वनि जागरूकता, अक्षर-ज्ञान, प्रवाहपूर्ण वाचन एवं समझ आधारित पठन पर गतिविधि-आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने बताया कि नियमित पठन अभ्यास बच्चों के भाषा विकास की नींव को सुदृढ़ करता है।
मास्टर ट्रेनर डिजेन्द्र कुर्रे ने कहा कि यदि शिक्षक गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाते हैं, तो बच्चों में पढ़ने, लिखने एवं गणित की नींव मजबूत होती है। उन्होंने शिक्षकों से नवाचार एवं सतत मूल्यांकन पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
सीएसी त्रिकांत बाग ने एफएलएन के प्रभावी क्रियान्वयन में शैक्षणिक सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एफएलएन केवल एक योजना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की आधारशिला है। नियमित अभ्यास, पुनरावृत्ति एवं आनंददायी गतिविधियों से अपेक्षित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

संकुल समन्वयक आरिफ बेग अंकोरी ने कक्षा-कक्ष के व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्थानीय परिवेश से जुड़े उदाहरण, खेल, समूह कार्य एवं सहपाठी अधिगम बच्चों को सहज रूप से सीखने में सहायक होते हैं। उन्होंने कमजोर बच्चों पर विशेष फोकस करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शंकर सिदार ने भाषा एवं गणित शिक्षण के चार ब्लॉकों—पठन, लेखन, संख्याबोध एवं समस्या समाधान—पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि बच्चों की सोच, समझ एवं अभिव्यक्ति को महत्व देने से सीखना स्थायी बनता है।

इस अवसर पर विजय घृतलहरे एवं सुरेश नन्द ने कहा कि एफएलएन प्रशिक्षण वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। यदि बच्चों की नींव मजबूत होगी, तो आगे की शिक्षा स्वतः सशक्त होगी।
बीआरसीसी अनिल सिंह साव ने कहा कि एफएलएन कार्यक्रम केवल एक योजना नहीं, बल्कि शिक्षकों के माध्यम से बच्चों के भविष्य निर्माण की एक सतत प्रक्रिया है। विद्यालय स्तर पर नियमित अभ्यास, मूल्यांकन एवं नवाचार से ही निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने सभी शिक्षकों से प्रशिक्षण को गंभीरता से अपनाने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण के दौरान समूह कार्य, रोल प्ले, चर्चा, शिक्षण सहायक सामग्री का प्रयोग, पाठ्यपुस्तक एवं अभ्यास पुस्तिका पर अभ्यास तथा सतत मूल्यांकन की प्रक्रिया पर भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। शिक्षकों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, व्यवहारिक एवं कक्षा-कक्ष में सीधे लागू करने योग्य बताया।
इस अवसर पर जमदरहा जोन के समस्त शिक्षक, सीआरसी सदस्य एवं शैक्षणिक सहयोगी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण से शिक्षकों में उत्साह का संचार हुआ और एफएलएन को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प लिया गया।



