एनएचएम कर्मचारियों का आंदोलन 12वें दिन भी जारी, महासमुंद से 410 कर्मचारी पहुंचे रायपुर, स्थायीकरण की मांग पर सरकार को घेरा
महासमुंद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं। नियमितीकरण, ग्रेड पे और सेवा सुरक्षा जैसी प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेशभर के कर्मचारी रायपुर स्थित तुता धरना स्थल पर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। आंदोलन के 12वें दिन महासमुंद जिले से 410 कर्मचारी रायपुर पहुंचे और एकजुट होकर अपनी मांगों को दोहराया।
कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से संविदा प्रणाली में काम करते-करते उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। चुनावी मंचों पर वादा किए जाने के बावजूद अभी तक नियमितीकरण की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि शासन के अड़ियल रवैये के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट गहराता जा रहा है।
प्रधानमंत्री के घोषणा पत्र का हवाला
शुक्रवार को तुता धरना स्थल पर कर्मचारियों ने अलग-अलग समूहों में बंटकर जनता के बीच अपनी बात रखी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चुनावी घोषणाओं और मंचों से कही गई बातों को सबूत के तौर पर साझा किया। कर्मचारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 100 दिनों के भीतर संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की बात कही थी, लेकिन आज भी वह वादा अधूरा है।
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारी चार ग्रुपों में बंटकर लोगों के बीच गए और “मोदी की गारंटी” का हवाला देते हुए जनता को समझाया कि किस तरह उनके साथ धोखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते स्थायीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाएंगी।
धरना स्थल पर गूंजे नारे
एनएचएम कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर जमकर नारेबाजी की। उनके नारों में असंतोष और पीड़ा साफ झलक रही थी।
कुछ प्रमुख नारे इस प्रकार रहे—
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“न बीमा है, न पेंशन है, दुनिया भर का टेंशन है।”
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“जो वादा किया है निभाना होगा, एनएचएम कर्मचारियों को स्थायी बनाना होगा।”
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“संविदा प्रथा बंद करो, एनएचएम को स्थायी करो।”
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“आधा रोटी आधा पेट, संविदा जीवन चढ़ गया भेंट।”
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“जो हमसे टकराएगा, पांच साल पछताएगा।”
इन नारों के जरिए कर्मचारियों ने सरकार पर सीधा हमला बोला और अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि संविदा व्यवस्था ने उनका सामाजिक और आर्थिक जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
कर्मचारियों की प्रमुख 10 सूत्रीय मांगें
एनएचएम कर्मचारियों ने सरकार के सामने 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्यतः—
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सभी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण।
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सेवा सुरक्षा और पेंशन की सुविधा।
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समान कार्य के लिए समान वेतन।
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ग्रेड पे की सुविधा।
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कार्य की स्थिरता और तबादला नीति।
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कर्मचारियों के लिए बीमा कवर।
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प्रमोशन और वेतन वृद्धि की गारंटी।
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कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल।
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मातृत्व और पितृत्व अवकाश की गारंटी।
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पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना।
कर्मचारियों का कहना है कि ये मांगें केवल उनके हित के लिए नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए भी जरूरी हैं।
सरकार के खिलाफ गुस्सा
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की बेरुखी से वे बेहद निराश हैं। उन्होंने कहा कि अगर शासन वास्तव में जनता की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर है तो उसे जल्द से जल्द संविदा प्रथा खत्म करके कर्मचारियों को स्थायी करना चाहिए।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी आवाज अनसुनी की गई तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। उन्होंने साफ कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं बंद होने के लिए कर्मचारी जिम्मेदार नहीं होंगे, बल्कि शासन का अड़ियल रवैया ही इसका कारण बनेगा।
जनता से समर्थन की अपील
धरना स्थल पर कर्मचारियों ने आम जनता से भी समर्थन की अपील की। उनका कहना है कि वे दिन-रात जनता की सेवा करते हैं, ग्रामीण अंचलों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाते हैं, लेकिन खुद के भविष्य को लेकर असुरक्षा में जी रहे हैं। ऐसे में जनता को भी उनके आंदोलन में साथ देना चाहिए।