बसना।फुलझर अंचल के गौरव डॉ. चित्तरंजन कर को छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन अवसर पर राज्य अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया गया। 5 नवंबर को नवा रायपुर में आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें हिंदी एवं अंग्रेजी साहित्य के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए पं. सुंदरलाल शर्मा सम्मान प्रदान किया।इस अवसर पर मंच पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, और सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।
हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. चित्तरंजन कर को सम्मानित।
डॉ. चित्तरंजन कर का जन्म महासमुंद जिले के सरायपाली तहसील के ग्राम पैकिन में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय दिवाकर कर शासकीय शिक्षक थे। डॉ. कर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम पैकिन से प्राप्त की और अपने करियर की शुरुआत शासकीय प्राथमिक शालाओं में शिक्षक के रूप में की।

उन्होंने तीन विषयों में एम.ए., पीएचडी. और डी.लिट. की उपाधि प्राप्त की। डॉ. चित्तरंजन कर ने राजीवलोचन महाविद्यालय, राजिम में रहते हुए पं. सुंदरलाल शर्मा के साहित्य पर शोधकार्य किया और बाद में पं. सुंदरलाल शर्मा शोधपीठ रायपुर के अध्यक्ष बने। उन्होंने अनेक साहित्यिक गोष्ठियों का आयोजन किया और “छत्तीसगढ़ी दानलीला” का हिंदी रूपांतरण कर राज्य की लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई।
डॉ. चित्तरंजन कर द्वारा तैयार “भारत का भाषा सर्वेक्षण” में छत्तीसगढ़ी और आदिवासी भाषाओं वाला खंड राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुआ, जिसका विमोचन भारत के राष्ट्रपति ने किया था। उन्होंने अब तक 37 पुस्तकों और 250 से अधिक शोधपत्रों की रचना की है।

वे पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में साहित्य एवं भाषा अध्ययनशाला के प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष और कला संकायाध्यक्ष रहे हैं। बाद में वे गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर और उड़ीसा केंद्रीय विश्वविद्यालय कोरापुट में मानद प्रोफेसर और कला संकाय के अधिष्ठाता भी रहे।
उनकी उपलब्धियों में छत्तीसगढ़ी व्याकरणिक कोटियां, बोलचाल की छत्तीसगढ़ी, और छत्तीसगढ़ी व्याकरण जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें शामिल हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य शासन से 2009 और 2020 में राजभाषा सम्मान, 2022 में भारतीय गौरव सम्मान, और 2023 में एक भारत श्रेष्ठ भारत सम्मान भी प्राप्त किया।
डॉ. कर को 2025 के राज्य अलंकरण सम्मान से नवाजे जाने पर सरायपाली क्षेत्र में हर्ष और गर्व की लहर है।
शासकीय महाविद्यालय सरायपाली की प्राचार्य डॉ. संध्या भोई, छत्तीसगढ़ महिला आयोग की सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया, वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. पितांबर साहू, समाजसेवी तिलक प्रसाद साहू, तथा कई गणमान्य नागरिकों ने डॉ. कर को बधाई दी और कहा —
“डॉ. कर ने साहित्य, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।”





