महासमुंद। ग्राम पंचायत डोंगरीपाली में शुक्रवार को जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार ने स्कूलों का निरीक्षण कर बच्चों की पढ़ाई की जानकारी ली। इसी दौरान ग्रामीणों ने पंचायत में हुए कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट सौंपने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि 9 सितंबर को जांच टीम ने पंचायत में तीन दिनों तक जांच की थी, लेकिन 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच प्रतिवेदन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया।
डोंगरीपाली पंचायत घोटाले की जांच रिपोर्ट को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी, जिला पंचायत सीईओ ने अधिकारियों को लगाई फटकार।
ग्रामीणों ने शिकायत की कि जनपद पंचायत पिथौरा और संबंधित अधिकारी उन्हें लगातार टालमटोल कर रहे हैं। इस पर जिला पंचायत सीईओ ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि जब जांच पूरी हो चुकी है, तो ग्रामीणों को रिपोर्ट उपलब्ध कराने में देरी क्यों की जा रही है।
2.50 करोड़ का मामला
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व सरपंच अहिल्या बरिहा के कार्यकाल में सरकार की ओर से डोंगरीपाली पंचायत को विकास कार्यों के लिए लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपए दिए गए थे। इस राशि के उपयोग में भारी अनियमितता की शिकायत पर जनपद पंचायत सीईओ पिथौरा के आदेश से जांच टीम गठित की गई थी। जांच टीम 9 सितंबर को पंचायत भवन डोंगरीपाली पहुंची और लगातार तीन दिनों तक रिकार्ड खंगाले। उस समय अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि तीन दिन में जांच प्रतिवेदन सौंप दिया जाएगा, लेकिन अब तक रिपोर्ट लंबित है।
ग्रामीणों ने दी चेतावनी
जांच प्रतिवेदन समय पर न मिलने से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। शिकायतकर्ताओं में एमडी सागर, खिरोद पटेल, अमितेष बरिहा सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही जांच प्रतिवेदन नहीं दिया गया, तो वे जनपद पंचायत पिथौरा कार्यालय का घेराव करेंगे या फिर अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे।
सीईओ का आश्वासन
जिला पंचायत सीईओ ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जांच प्रतिवेदन जल्द ही उपलब्ध करा दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि जांच पूरी होने के बाद भी देरी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।







