महासमुंद। पिथौरा वन परिक्षेत्र में एक बार फिर वन्य जीवों हिरण के अवैध शिकार का मामला सामने आया है। ग्राम गिरना और छिंदौली में वन विभाग की टीम ने रविवार को दबिश देकर पांच आरोपियों को हिरण (चीतल) के शिकार के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोपियों से मौके पर ताजा मांस, शिकार में उपयोग किए गए सामान और खून से सनी चटाई जब्त की गई है। इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
पिथौरा वन परिक्षेत्र में हिरण का शिकार, वन विभाग ने पांच आरोपियों को किया गिरफ्तार।
डीएफओ मयंक पांडेय ने बताया कि वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग पिथौरा वन परिक्षेत्र के कक्ष-228 में योजनाबद्ध तरीके से चीतल का शिकार कर रहे हैं। सूचना की पुष्टि होने पर संयुक्त वन मंडलाधिकारी पिथौरा ने तत्काल सर्च वारंट जारी किया। इसके बाद परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा के नेतृत्व में टीम ने ग्राम गिरना और छिंदौली में एक साथ दबिश दी।
मांस और शिकार का सामान जब्त
वन विभाग की टीम ने आरोपी भोला खड़िया के घर की तलाशी ली। इस दौरान घर से हिरण का ताजा मांस, खून से सनी चटाई और अन्य सामान बरामद हुआ। आरोपी की निशानदेही पर टीम ने कक्ष-228 के पास घटना स्थल से करीब 6.500 किलो हिरण का मांस, 5.250 किलो जीआई तार और बांस की खूंटी भी जब्त की। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने मिलकर हिरण का शिकार किया और मांस का आपस में बंटवारा कर रहे थे।
वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
वन विभाग ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 50, 34, 44 और 51 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। आरोपियों को न्यायालय प्रथम श्रेणी पिथौरा में पेश किया गया, जहां से उन्हें 9 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
अवैध शिकार पर सख्ती
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद कुछ लोग अवैध शिकार जैसी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्य जीवों का शिकार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
क्षेत्र में फैली दहशत और चर्चा
हिरण के शिकार का मामला सामने आने के बाद पिथौरा क्षेत्र के ग्रामीणों और वन्य जीव प्रेमियों में आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि वन्य जीव न केवल जंगल की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि पर्यावरण के संतुलन के लिए भी जरूरी हैं। ऐसे में शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को और सख्ती करनी चाहिए।
बढ़ती घटनाओं पर चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में वन्य जीवों के शिकार की घटनाएं सामने आई हैं। खासकर हिरण, सांभर और जंगली सूअर को शिकारियों द्वारा निशाना बनाया जाता है। ये घटनाएं वन्य जीव संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े करती हैं।
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि यदि उन्हें कहीं भी शिकार से जुड़ी कोई गतिविधि दिखे तो तुरंत विभाग को सूचित करें। साथ ही जंगलों में वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक करने का अभियान भी चलाने की बात कही गई है।






