बसना(जीतयादव)।शासकीय प्राथमिक शाला करनापाली विकासखंड बसना जिला महासमुंद में शीतकालीन अवकाश के दौरान नवाचारी शिक्षा का एक सराहनीय उदाहरण देखने को मिल रहा है। विद्यालय में शिक्षक, पूर्व छात्र, अभिभावक एवं समुदाय के सहयोग से “सामूहिक पहल से सामूहिक पढ़ाई” (ग्रुप स्टडी/कम्युनिटी एजुकेशन) की अभिनव शुरुआत की गई है, जिसके तहत बच्चे छोटे-छोटे समूह बनाकर आपसी सहयोग से अध्ययन-अध्यापन कर रहे हैं।

विद्यालय के प्रधान पाठक श्री गिरधारी साहू ने सामूहिक पढ़ाई की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि जब लोग एक साथ मिलकर सीखते हैं, विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, एक-दूसरे को सिखाते हैं और समस्याओं का समाधान सामूहिक रूप से करते हैं, तो उसे ग्रुप स्टडी या कम्युनिटी एजुकेशन कहा जाता है। यह प्रक्रिया छात्रों में सहयोग, आपसी जुड़ाव एवं आजीवन सीखने की क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही यह घर, स्कूल और समुदाय के बीच मजबूत संबंध स्थापित कर सामुदायिक विकास एवं सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनती है।

शीतकालीन अवकाश में नवाचारी शिक्षा की मिसाल शिक्षकों की संयुक्त पहल से बच्चों की पढ़ाई जारी
विद्यालय में पदस्थ शिक्षक श्री वीरेंद्र कुमार कर ने बताया कि सामूहिक पढ़ाई के माध्यम से बच्चे चर्चा और संवाद द्वारा विषयों की गहरी समझ विकसित कर रहे हैं। साथियों के साथ मिलकर सीखने से बच्चों में उत्साह बढ़ रहा है और सीखने की प्रक्रिया रोचक बन रही है। समूह में कार्य करने से बच्चों को विभिन्न दृष्टिकोण मिलते हैं, जिससे जटिल समस्याओं का समाधान आसान हो रहा है। इसके साथ ही संवाद, सहयोग एवं निर्णय लेने जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कौशल भी बच्चों में विकसित हो रहे हैं।

वहीं विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती निर्मला नायक ने सामुदायिक सहभागिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामुदायिक शिक्षा शिक्षा को केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखती, बल्कि पूरे समुदाय को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया से जोड़ती है। यह जीवन भर चलने वाली सीखने की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति और समुदाय को सशक्त बनाना है ताकि वे वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान कर सकें तथा सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की शिक्षा से घर, स्कूल और समुदाय के संबंध मजबूत होते हैं और बच्चों को बागवानी, पोषण, साक्षरता एवं नागरिक जुड़ाव जैसे व्यवहारिक ज्ञान और कौशल भी प्राप्त होते हैं।

विद्यालय द्वारा शीतकालीन अवकाश में भी बच्चों के शैक्षणिक विकास हेतु किए जा रहे इन नवाचारी प्रयासों पर शाला विकास समिति एवं ग्रामीणों ने हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने विद्यालय परिवार की प्रशंसा करते हुए ऐसे रचनात्मक और उपयोगी शैक्षणिक नवाचारों को निरंतर आगे बढ़ाने हेतु शिक्षकों को प्रेरित किया है।



