बसना (जीत यादव)। फुलझर राज क्षेत्र की चैतन्य भक्त संकीर्तन मंडलियों की एक महत्वपूर्ण महाबैठक आगामी 13 दिसंबर को गढ़फुलझर मंदिर परिसर में आयोजित की जा रही है। सरायपाली, बसना, पिथौरा और आसपास के क्षेत्रों की गौरांग भक्त मंडलियों में इस बैठक को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
संकीर्तन परंपरा में बढ़ती अनियमितताओं पर चिंता
भक्तजनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से चैतन्य महाप्रभु की पावन संकीर्तन परंपरा में कई प्रकार की अनियमितताएँ सामने आ रही हैं।
कई संकीर्तन मंडलियाँ भक्ति भावना से अधिक प्रदर्शन, व्यावसायिक लाभ और मनोरंजन को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे भक्त समुदाय में नाराजगी है।
भक्तों का आरोप है कि—
संकीर्तन में गौड़ीय प्रेम संकीर्तन की मर्यादा और नियमों की उपेक्षा हो रही है।
कुछ आयोजक केवल आर्थिक लाभ को महत्व देते हैं और उन्हीं मंडलियों को बुलाते हैं, जिनका भक्तिभाव से कोई संबंध नहीं होता।
इससे चैतन्य महाप्रभु द्वारा प्रतिपादित नाम-स्मरण और संकीर्तन नामयज्ञ का पवित्र स्वरूप प्रभावित हो रहा है।
सुधार और दिशा-निर्देश तय करने को महाबैठक
इन परिस्थितियों को देखते हुए फुलझर क्षेत्र की सभी प्रमुख संकीर्तन मंडलियों ने संयुक्त रूप से यह बड़ा निर्णय लेते हुए महाबैठक बुलाने का फैसला किया है।
बैठक में निम्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा—
संकीर्तन नियमावली का निर्माण
परंपरागत भक्ति मार्ग का संरक्षण
संकीर्तन की मर्यादा एवं शुचिता की पुनर्स्थापना
आगामी आयोजनों में सुधार और समन्वय
संकीर्तन मंडलियों के चयन और संचालन के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश
क्षेत्र में संपर्क अभियान जारी
आयोजक समिति के सदस्यों द्वारा पूरे क्षेत्र में व्यापक संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। समिति ने भक्तों, श्रद्धालुओं और मंडलियों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे इस भक्ति-उद्धारक महाबैठक में सम्मिलित होकर संकीर्तन परंपरा को पुनः सशक्त बनाने में सहयोग दें।




