छत्तीसगढ़: रेत खनन पर बैन, फिर भी पैरी नदी घाटों से रोजाना 200 से ज्यादा हाइवा रेत सप्लाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ में रेत खनन पर 10 जून से 15 अक्टूबर तक बैन है। इस दौरान रायपुर और धमतरी समेत सभी जिलों में रेत घाटों की लीज रद्द है, लेकिन रेत माफिया खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। राजधानी रायपुर से महज 50 किलोमीटर दूर पैरी नदी के घाटों पर हर रात पोकलेन मशीनें चल रही हैं और ट्रकों (हाइवा) में रेत भरकर सप्लाई की जा रही है।
28 दिन की पड़ताल में बड़ा खेल उजागर
नवापारा से लगे बुड़ेनी घाट से हर रात करीब 200 से ज्यादा हाइवा रेत रायपुर भेजी जा रही है। 2 अगस्त से 31 अगस्त तक लगातार 28 दिन की पड़ताल में पैरी और महानदी घाटों से रेत सप्लाई का यह बड़ा खेल उजागर हुआ है।
ऐसे चलता है अवैध कारोबार
रेत माफिया ने इसके लिए बाकायदा पूरा सिस्टम खड़ा कर रखा है।
रात 10 बजे के बाद मशीनें नदी में उतारी जाती हैं।
सुबह 4 बजे तक खनन और सप्लाई जारी रहती है।
रायपुर में एक हाइवा रेत की कीमत लगभग 25 हजार रुपए है।
रोजाना 50 से 55 लाख रुपए का अवैध कारोबार हो रहा है।
अभनपुर बस स्टैंड से लेकर रायपुर तक ट्रैकिंग
31 अगस्त की रात रिपोर्टिंग टीम अभनपुर बस स्टैंड पहुंची। इस दौरान अधिकांश दुकानें बंद थीं। नजदीकी गणेश पंडाल में भजन बज रहे थे और सड़क किनारे टी स्टॉल पर कुछ ड्राइवर चाय पी रहे थे। अचानक एक ड्राइवर को फोन आया और वह तुरंत अपने हाइवा को राजिम की ओर दौड़ाने लगा। करीब 25 किलोमीटर बाद हाइवा गोबरा नवापारा बस्ती से चकमा देकर निकल गया। लगभग साढ़े तीन घंटे बाद तड़के 3:30 बजे वही हाइवा गोबरा नवापारा बाजार के बीच से रेत लेकर रायपुर की ओर जाते हुए दिखा।
नियमों की अनदेखी
हालांकि सरकार ने मानसून के दौरान नदियों की सुरक्षा और अवैध खनन रोकने के लिए 15 अक्टूबर तक रेत खनन पर पूरी तरह रोक लगाई है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। खुलेआम पोकलेन और हाइवा के जरिए बड़े पैमाने पर रेत माफिया करोड़ों रुपए का धंधा कर रहे हैं।



