बसना(जीतयादव)। ग्राम तरेकेला के लगभग 80 ग्रामीणों ने मंगलवार को आश्रम की दान भूमि को निजी भूमि घोषित किए जाने के विरोध में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। “आश्रम बचाओ” के नारों के साथ ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
“आश्रम बचाओ” के नारों के साथ कलेक्टोरेट पहुंचा ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल।
ग्रामीणों का आरोप है कि आश्रम को पूर्व में श्रद्धालुओं और दानदाताओं द्वारा दी गई भूमि को अब निजी भूमि के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है, जो पूरी तरह अनुचित है। उनका कहना है कि यह भूमि वर्षों से धार्मिक, सामाजिक और सेवा कार्यों के लिए उपयोग में लाई जा रही है, इसलिए इसे निजी घोषित करना आस्था और जनभावनाओं के साथ अन्याय है।
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ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट कहा कि दान की भूमि किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं है, बल्कि समाज की धरोहर है। यदि इस पर निजी दावा किया गया तो यह न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाएगा।
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कलेक्टर श्री लगेंह ने प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करते हुए कहा कि आश्रम लोगों की आस्था का प्रतीक है और इस मामले में पूरी निष्पक्षता के साथ जांच की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ कोई समझौता नहीं होगा और सच्चाई सामने आने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने आश्रम के महंत लखन मुनि साहेब से भी बातचीत कर सभी पक्षों को सुनने का आश्वासन दिया।
इस मुद्दे पर स्थानीय विधायक संपत अग्रवाल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आश्रम क्षेत्र की आस्था का केंद्र है और दान की भूमि से छेड़छाड़ किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर न्यायपूर्ण निर्णय लेने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, दानदाता परिवार के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि दान भूमि को निजी घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजरें प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।




