बसना। शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अरेकेल में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के लिए मासिक वॉल मैगजीन ‘बाल दर्पण’ का प्रकाशन वर्ष 2017 से नियमित रूप से किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी लेखन क्षमता, सामान्य ज्ञान और रचनात्मक विचारों को सामने लाने का अवसर मिल रहा है। समय के साथ यह मैगजीन विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
अरेकेल स्कूल में विद्यार्थियों के लेखन कौशल, सामान्य ज्ञान और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने की पहल, ‘चर्चा पत्र’ में भी हुआ उल्लेख।
शिक्षक प्रेमचन्द साव के नेतृत्व में संचालित इस पहल को विकासखंड शिक्षा अधिकारी बद्री विशाल जोल्हे, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी लोकेश्वर सिंह कंवर तथा विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक अनिल सिंह साव का मार्गदर्शन मिल रहा है। बाल कैबिनेट की वॉल मैगजीन प्रभारी नेहा साव और नमिता भी इसके नियमित प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
‘बाल दर्पण’ में विद्यार्थी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, समसामयिक समाचार, विज्ञान-तकनीक, पर्यावरण, खेल, शिक्षा, सामान्य ज्ञान और प्रेरक प्रसंगों से जुड़ी सामग्री प्रस्तुत करते हैं। इसके अलावा बच्चों के बनाए चित्र और ज्ञानवर्धक रचनाएं भी मैगजीन में शामिल की जाती हैं। विद्यार्थी स्वयं सामग्री का चयन करने से लेकर लेखन, चित्रांकन और प्रस्तुतीकरण तक में भागीदारी निभाते हैं। इससे उनमें पढ़ने, समझने और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की क्षमता विकसित हो रही है।
‘चर्चा पत्र’ में भी मिला उल्लेख
अरेकेल विद्यालय की इस शैक्षणिक पहल को ‘चर्चा पत्र’ में भी स्थान मिला है। इसमें ‘बाल दर्पण’ के नियमित प्रकाशन और विद्यार्थियों के पठन-पाठन, रचनात्मकता तथा लेखन कौशल के विकास में इसकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। इसे विद्यालय परिवार और विद्यार्थियों के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।
शिक्षक प्रेमचन्द साव के अनुसार, इस मैगजीन का उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर उन्हें पढ़ने, सोचने, लिखने और अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने का अवसर देना है। नियमित लेखन और ज्ञानवर्धक सामग्री के अध्ययन से विद्यार्थियों की भाषा क्षमता, शब्द-भंडार, सामान्य ज्ञान और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिल रहा है।
अरेकेल स्कूल में ‘बच्चों द्वारा, बच्चों के लिए’ की भावना पर आधारित ‘बाल दर्पण’ पिछले कई वर्षों से विद्यार्थियों को सीखने और सृजन करने के लिए प्रेरित कर रही है। विद्यालय परिवार का मानना है कि जब बच्चों के विचारों और कल्पनाओं को अभिव्यक्ति का अवसर मिलता है, तो विद्यालय की दीवारें भी सीखने की जीवंत पाठशाला बन जाती हैं।


