बसना(जीतयादव)।राष्ट्रीय आविष्कार अभियान योजना के अंतर्गत भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), पुणे में 28 से 30 जनवरी तक आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य के 100 चयनित शिक्षकों ने सहभागिता की। इस कार्यशाला में महासमुन्द जिले से भी चयनित शिक्षकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय आविष्कार अभियान में वैज्ञानिक सोच और नवाचार से बच्चों को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल।
कार्यशाला का आयोजन राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें आयुक्त श्रीमती किरण कौशल, उपसंचालक श्री डी. के. सारस्वत, सह संचालक श्रीमती मंजू लता साहू, एपीसी श्री राजेश सोनकर के मार्गदर्शन एवं एपीसी श्री बसंत कुमार वर्मा के नेतृत्व में यह शैक्षणिक दल पुणे पहुँचा।
महासमुन्द जिले से इन शिक्षकों ने किया जिले का प्रतिनिधित्व।
राष्ट्रीय आविष्कार अभियान योजना के अंतर्गत महासमुन्द जिले से चयनित शिक्षकों में —
श्री मधु कुमार साहू, शा. पूर्व माध्यमिक शाला देवरी, विकासखंड बागबाहरा।
श्रीमती उत्तरा कुमार चौधरी, विकासखंड बसना।
श्रीमती खेमलता प्रधान, पिथौरा।
श्रीमती लक्ष्मी नायक, सरायपाली।
शामिल रहीं, जिन्होंने कार्यशाला के दौरान उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए जिले का गौरव बढ़ाया।
विज्ञान को अनुभव से जोड़ने का मिला अवसर।
इस अभियान के अंतर्गत शिक्षकों ने साइंस सेंटर का अवलोकन, कल्पक घर में सरल वैज्ञानिक प्रयोग, तारामंडल की सैर, खगोलीय पिंडों का प्रत्यक्ष ज्ञान, विभिन्न अनुसंधान केंद्रों का भ्रमण तथा वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद किया। यह अनुभव शिक्षकों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक बल्कि रोमांचक और प्रेरणादायी भी रहा।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक प्रशिक्षण।
कार्यशाला में नई शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए —
गतिविधि आधारित शिक्षण,
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का प्रभावी उपयोग,
बच्चों में वैज्ञानिक अवधारणाओं का विकास,
कम लागत में शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) निर्माण,
तथा शिक्षा में नवाचार एवं वैज्ञानिक अनुसंधान प्रवृत्ति विकसित करने हेतु विशेष सत्र आयोजित किए गए।
राष्ट्रीय आविष्कार अभियान कार्यशाला प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए आयोजित की गई, जो अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुई।कार्यशाला से लौटे शिक्षकों ने कहा कि यह प्रशिक्षण कक्षा-कक्ष में विज्ञान शिक्षण को और अधिक रोचक, व्यावहारिक एवं प्रभावी बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।





