बसना।विकासखंड मुख्यालय से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुडेकेल नाला का पुल पिछले पाँच वर्षों से टूटी व जर्जर अवस्था में पड़ा हुआ है। इस पुल का उपयोग कुडेकेल, जमडी, पोटापारा, मुढपाहर, बिंछिया, टांडा और सिरको सहित कई ग्रामों के हजारों निवासी प्रतिदिन करते हैं। लंबे समय से पुल क्षतिग्रस्त रहने से ग्रामीणों को स्कूल, अस्पताल, बाज़ार, रोजगार, सरकारी कार्यों व आपातकालीन परिस्थितियों में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पुल निर्माण न होने से लगातार हादसों से बढ़ी चिंता।
ग्रामीणों के मुताबिक, कुडेकेल नाला टूटे पुल से होकर गुजरते समय कई दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं। कुछ समय पहले पुल से नीचे गिरने के चलते एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई थी जबकि चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हाल ही में एक चार पहिया वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे वाहन सवार यात्रियों की जान संकट में पड़ गई। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में भय और नाराज़गी दोनों बढ़ी है।

ग्रामीणों का दावा — वर्तमान विधायक ने दिया था आश्वासन
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान भाजपा विधायक डॉ. सम्मत अग्रवाल ने विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें आश्वासन दिया था कि छह माह के भीतर कुडेकेल नाला पुल का निर्माण पूरा करा दिया जाएगा, परंतु ग्रामीणों के अनुसार अब तक कोई ठोस कार्यवाही शुरू नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि समय बीतता गया, पर वादा अधूरा ही रह गया, जिससे जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है।

NH-53 पर सांसद निवास के सामने चक्का जाम
समस्या के वर्षों से अनसुलझे रहने और लगातार हो रहे हादसों के बाद नाराज़ ग्रामीणों ने शनिवार को राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर सांसद निवास के सामने चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द स्थायी पुल निर्माण की मांग उठाई।

जनसहयोग से बना अस्थायी मार्ग
ग्रामीणों ने हार न मानते हुए आपसी सहयोग एवं सहभागिता से कुडेकेल नाला के ऊपर मुरुम डालकर अस्थायी मार्ग बनाया, जिसके सहारे फिलहाल दोपहिया और छोटे वाहन जोखिम के साथ गुजर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात की शुरुआत होते ही यह मार्ग पूरी तरह बह जाने की संभावना है।

एंबुलेंस आवागमन पर संकट
कुडेकेल नाला का पुल टूटने से एंबुलेंस का आना-जाना गंभीर रूप से बाधित हो रहा है। आपातकाल में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को समय पर अस्पताल पहुँचाना मुश्किल हो गया है। कई बार रास्ता पार न होने से एंबुलेंस बीच में रुक जाती है, जिससे उपचार में देरी और जान का जोखिम बढ़ जाता है।

किसानों को बड़ी दिक्कत
टूटा हुआ कुडेकेल नाला पुल किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। खेती-पाती से जुड़े सामान, बीज, खाद और उपज को बाजार व मंडी तक ले जाना मुश्किल हो रहा है। वाहन नहीं पहुंच पाने से समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी
टूटा हुआ कुडेकेल नाला पुल स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी समस्या बन गया है। रोजाना जोखिम उठाते हुए नाला पार करना पड़ता है। बरसात में फिसलने और गिरने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे उनकी शिक्षा और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।

कलेक्टर को कई बार सौंपा गया ज्ञापन
ग्रामीणों ने कुडेकेल नाला पुल समस्या के समाधान हेतु कई बार कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तुरंत निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की है। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है और वे आंदोलन का रूख अपनाने को मजबूर हो रहे हैं। 
समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पुल निर्माण को स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे और बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

तहसीलदार मैडम का आश्वासन
ग्रामीणों द्वारा समस्या उठाए जाने पर तहसीलदार मैडम ने आश्वासन दिया कि मामला संबंधित विभाग को भेजकर आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों से धैर्य रखने की अपील की और कहा कि समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।



