महासमुंद। इस साल समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होनी है, लेकिन खरीदी शुरू होने से पहले ही सहकारी समितियों में कर्मचारियों ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। यदि यह आंदोलन लंबा खिंचता है, तो एक बार फिर धान खरीदी प्रभावित हो सकती है।
धान खरीदी से पहले ही सहकारी समितियों की कर्मचारी आंदोलन पर
शुक्रवार को छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ ने मोर्चा खोलते हुए चार सूत्रीय मांगों को लेकर नगर में रैली और प्रदर्शन किया। हड़ताल के चलते शुक्रवार को सभी समितियां बंद रहीं। किसान खरीदी केंद्रों तक तो पहुंचे, लेकिन केंद्रों में ताले लटके होने के कारण मायूस होकर लौटना पड़ा।हड़ताल के कारण धान बेचने के लिए किसानों का पंजीयन, कैरी फारवर्ड और ईआरपी कार्य पूरी तरह ठप रहा।
प्रभारी अधिकारी बनाए जाने पर कर्मचारियों में असंतोष
छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष विजय कोसरे ने बताया कि खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी की तिथि 15 नवंबर तय की गई है।लेकिन सरकार के आदेश के अनुसार इस बार सरकारी अधिकारियों को खरीदी केंद्रों का प्रभारी बनाने की बात कही जा रही है, जिसे कर्मचारी अन्यायपूर्ण मान रहे हैं।

संघ का कहना है कि सरकार को धान खरीदी के दौरान स्पष्ट रूप से जवाबदारी तय करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो कि खरीदी से लेकर अंतिम उठाव तक की जिम्मेदारी किसकी होगी।इस संबंध में संघ ने डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिन्होंने 3 नवंबर तक मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आगामी धान खरीदी का बहिष्कार किया जाएगा।
इस अवसर पर तुलाराम ठाकुर, घनश्याम चौधरी, गुलाब नायक, संतोष साहू, ईश्वर पटेल, संतोष पटेल, राजेश प्रधान सहित कई कर्मचारी उपस्थित रहे।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
सुखत राशि और परिवहन भुगतान — धान खरीदी वर्ष 2023-24 में परिवहन के बाद संपूर्ण सुखत राशि समितियों को दी जाए या प्रत्येक सप्ताह परिवहन पूर्ण किया जाए।
शून्य शार्टेज प्रोत्साहन — शून्य शार्टेज प्रोत्साहन का प्रावधान कर कमीशन, प्रशांगिक और सुरक्षा व्यय में वृद्धि की जाए।
भत्ते और मानदेय में बढ़ोतरी — मध्यप्रदेश की तरह उचित मूल्य दुकान विक्रेताओं को प्रतिमाह ₹3000 दिया जाए।
प्रबंधकीय अनुदान राशि — प्रदेश की 2058 समितियों में कार्यरत कर्मचारियों को वेतनमान देने हेतु प्रति समिति प्रति वर्ष ₹3.3 लाख प्रबंधकीय अनुदान दिया जाए।
प्रभारी अधिकारी की जवाबदारी तय हो — खरीदी से लेकर अंतिम धान उठाव तक की जवाबदारी अधिकारी प्रभारी की लिखित रूप में तय की जाए।
हड़ताल का असर — 400 राशन दुकानों में वितरण ठप
हड़ताल का असर जिले की 400 राशन दुकानों पर भी पड़ा। शुक्रवार को चावल, शक्कर, नमक, चना आदि का वितरण नहीं हो सका।
आमतौर पर माह की शुरुआत में ही राशन वितरण की तैयारी हो जाती है, लेकिन सोसायटी बंद रहने से भंडारित सामग्री का वितरण रुक गया।
धान खरीदी केंद्रों में तैयारी अधूरी
धान खरीदी शुरू होने में अब केवल 20 दिन शेष हैं, लेकिन कई खरीदी केंद्रों में फड़ की सफाई तक नहीं हुई है।कई केंद्रों की बाउंड्रीवाल टूटी हुई है और बुनियादी व्यवस्थाएं अधूरी हैं।
अब भी 30% किसानों का पंजीयन बाकी
जिले में अभी भी लगभग 30 प्रतिशत किसानों का धान पंजीयन शेष है। अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है, लेकिन संघ की हड़ताल 28 अक्टूबर तक जारी रहेगी।ऐसे में यह आशंका है कि समय पर पंजीयन पूरा न होने से बड़ी संख्या में किसान धान बेचने से वंचित रह जाएंगे।





