मूसलाधार बारिश से परसवानी व सागुनढ़ाप नाले में उफान, 48 घंटे ठप रहा सांकरा-लारीपुर मार्ग
सांकरा । मंगलवार-बुधवार की रात हुई मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर क्षेत्र के लोगों को बड़ी मुश्किल में डाल दिया। सांकरा से लारीपुर तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग पर पड़ने वाले परसवानी और सागुनढ़ाप नाले में पानी पुल से करीब 5 फीट ऊपर बहने लगा। तेज बहाव के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और लगातार 48 घंटे तक लोगों की आवाजाही थम गई।
गुरुवार को भी नालों में पानी का स्तर कम नहीं हुआ था, जिससे समस्या बनी रही। इस दौरान स्कूली बच्चे, ड्यूटी पर जाने वाले शिक्षक, डॉक्टर, मरीज, यात्री और बसें सभी जगह-जगह फंसे रहे। स्थानीय लोगों ने बताया कि रोजाना करीब 10 हजार यात्री इस मार्ग का उपयोग करते हैं, लेकिन बारिश के दिनों में यह मार्ग हमेशा संकट का कारण बन जाता है।
बारिश से बिगड़ा जनजीवन
मूसलाधार बारिश के कारण गांव-गांव का संपर्क टूट गया। लोग जरूरी कामों के लिए भी घर से बाहर नहीं निकल पाए। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई तो वहीं मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में भी ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। कई वाहन नालों के दोनों ओर खड़े रहे, जो पानी घटने का इंतजार करते रहे।
यात्री बसों के रुकने से आम यात्रियों को दूसरे विकल्प तलाशने पड़े। कई लोग मजबूरी में पैदल ही लंबा रास्ता तय करने को विवश हुए। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।
पुल-पुलिया बने हादसों का कारण
स्थानीय निवासियों ने बताया कि सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और पुल-पुलिया इतने पुराने हो गए हैं कि थोड़ी सी बारिश में ही नालों पर पानी ऊपर से बहने लगता है। इस वजह से बारिश के मौसम में अक्सर यातायात बाधित हो जाता है।
परसवानी और सागुनढ़ाप नाले के ऊपर समतल पुल नहीं होने के कारण समस्या और भी गंभीर हो जाती है। कई बार लोग पानी के बहाव में वाहन समेत फंस जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। इस बार ग्रामीणों ने सतर्कता बरतते हुए किसी को भी नाला पार करने की अनुमति नहीं दी, लेकिन फिर भी खतरा बना रहा।
आजादी के 78 साल बाद भी नहीं मिली सुविधा
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी क्षेत्र को सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच मार्ग की सुविधा नहीं मिल पाई है। नेताओं ने कई बार आश्वासन दिया, विधायक और जनप्रतिनिधि विधानसभा में मुद्दा भी उठा चुके हैं, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
लोगों का कहना है कि जिस मार्ग से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं, वह इतना उपेक्षित है कि हल्की बारिश में ही आवागमन ठप हो जाता है। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
ग्रामीणों की मांग
स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस मार्ग पर मजबूत और ऊंचे पुल का निर्माण कराया जाए। साथ ही सड़क की मरम्मत कर इसे दुरुस्त किया जाए ताकि बारिश के मौसम में आम लोगों को दिक्कतों से छुटकारा मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग ओडिशा को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है, इसलिए इसे प्राथमिकता में रखकर कार्य होना चाहिए। यहां से व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की आवाजाही होती है, ऐसे में उचित सड़क और पुल-पुलिया की व्यवस्था बेहद जरूरी है।
प्रशासन की चुप्पी
घटना के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर जरूर पहुंचा, लेकिन केवल स्थिति का जायजा लेकर लौट गया। अब तक कोई ठोस कदम उठाने की घोषणा नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में रोष देखा जा रहा है। लोग कहते हैं कि बारिश थमने के बाद प्रशासन समस्या को भूल जाता है, जबकि हर साल इसी तरह की स्थिति दोहराई जाती है।
भविष्य को लेकर चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मजबूत पुल और सड़क नहीं बनेंगे, तब तक समस्या का समाधान संभव नहीं है। बरसात के दिनों में नालों का उफान और जर्जर पुल-पुलिया आने वाले समय में भी लोगों को परेशान करते रहेंगे। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।



