महासमुंद। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत जिले में शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है, लेकिन इसके बावजूद शिक्षकों के संलग्नीकरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि राजनीतिक पहुंच और अधिकारियों से नजदीकी रखने वाले शिक्षकों को नियमों से परे रखकर मनमाना लाभ दिया जा रहा है।
शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण पर उठे सवाल मनमाना संलग्नीकरण जारी।
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि शिक्षक अपने मूल शैक्षणिक कार्य से जुड़े रहें, लेकिन जिले में कई शिक्षक-शिक्षिकाएं अन्य विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षा विभाग पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त शिक्षकों के प्रति मेहरबान होने का आरोप है।
नियमों को दरकिनार कर संलग्नीकरण
जिले में पदस्थापना और संलग्नीकरण की प्रक्रिया में नियम-कायदों की अनदेखी की जा रही है। आम शिक्षकों पर तो नियमों का कड़ाई से पालन होता है, लेकिन प्रभावशाली शिक्षकों को अपात्र होने के बावजूद समग्र शिक्षा में अधिकारी पद पर प्रतिनियुक्ति मिल रही है। यहां तक कि एक गृहमंत्री के रिश्तेदार को भी अपात्र होते हुए DMC बनाए जाने का उल्लेख सामने आया है।
न्यायालय की शरण में शिक्षक
युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर कई शिक्षकों ने आपत्ति दर्ज की है। आरोप है कि वरिष्ठ को कनिष्ठ और कनिष्ठ को वरिष्ठ बताकर मनमाना युक्तियुक्तकरण किया गया। इस विसंगति से परेशान कुछ शिक्षक न्यायालय की शरण में जा चुके हैं। वहीं, कुछ शिक्षक तो 16 जून को कार्यभार ग्रहण करने के बाद से स्कूल ही नहीं पहुंचे हैं।
विभाग का दावा
हालांकि, शिक्षा विभाग के अधिकारी इन आरोपों से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिले में किसी भी प्रकार का अवैध संलग्नीकरण नहीं किया गया है और युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।




