ग्राम जर्रा की आदिवासी महिला का बहिष्कार मामला सुलझा
पीड़िता ने लगाई थी न्याय की गुहार
पिथौरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत नरसिंगपुर अंतर्गत ग्राम जर्रा की आदिवासी महिला सेमबाई सिदार को समाज से बहिष्कृत कर दिया गया था। पीड़िता ने इस संबंध में एसपी आशुतोष सिंह को लिखित शिकायत दी थी और सरपंच नवलीन मांझी पर गंभीर आरोप लगाए थे।
51 हजार का जुर्माना और राशन-पानी बंद
पीड़िता का कहना था कि उनके ससुर के घर पर हुई जांच में शराब की कुछ मात्रा मिली थी। इसका बदला उनसे लिया गया और उन पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। पंचायत बैठक में उनके खिलाफ गलत फैसला लेकर राशन-पानी बंद कर दिया गया। यहां तक कि ग्रामीणों को चेतावनी दी गई कि अगर कोई उनसे बातचीत करेगा तो उसे 10 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा।
प्रशासन हरकत में आया
भास्कर ने 7 सितंबर के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। पीड़िता ने पिथौरा एसडीएम को भी लिखित शिकायत दी थी। एसडीएम ने नायब तहसीलदार पिरदा को जांच के आदेश दिए।
जांच और समझाइश
नायब तहसीलदार ललित सिंह ने गांव जाकर सरपंच और ग्रामीणों के साथ बैठक की। ग्रामीणों को कानून की जानकारी और समझाइश दी गई। सरपंच नवलीन मांझी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और दोबारा ऐसी गलती न करने का संकल्प लिया।
बहिष्कार अपराध है : प्रशासन
नायब तहसीलदार ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या परिवार को समाज से सामूहिक बहिष्कार करना अपराध है। यदि ऐसा पाया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्रामीणों से कहा गया कि गांव में कोई भी व्यक्ति अवैध शराब बनाने या बेचने जैसे गैरकानूनी काम न करे। ऐसी स्थिति में तत्काल आबकारी विभाग और पुलिस को सूचित करें।



