रायपुर। लाखे नगर इलाके में इस साल गणेश उत्सव के दौरान एक अनोखी प्रतिमा की स्थापना की गई थी। सिंधी युवा एकता गणेश उत्सव समिति ने भगवान गणेश की AI तकनीक से तैयार प्रतिमा पंडाल में स्थापित की। आधुनिकता और परंपरा के इस मेल को देखने के लिए स्थानीय लोग और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुँच रहे थे। लेकिन यह प्रयोग विवादों में घिर गया।
भगवान गणेश की प्रतिमा के स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की गई है।
देर रात पंडाल के बाहर अचानक माहौल बिगड़ गया। राम भक्त सेना और अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े लोग पंडाल के सामने विरोध प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भगवान गणेश की प्रतिमा के स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की गई है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका आरोप था कि समिति को पहले भी परंपरागत स्वरूप की प्रतिमा स्थापित करने की हिदायत दी गई थी, लेकिन समिति ने इसकी अनदेखी कर दी।
सड़क पर जाम और तनावपूर्ण माहौल
जैसे ही विवाद बढ़ा, संगठन के लोग पंडाल के पास सड़क पर बैठ गए और चक्का जाम कर दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतार लग गई। आसपास का पूरा इलाका अव्यवस्थित हो गया। इस दौरान राहगीरों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन तुरंत हरकत में आया। शहर के 12 थानों के थाना प्रभारियों को मौके पर बुलाया गया और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की।
पुलिस-प्रशासन की समझाइश
करीब चार घंटे तक माहौल तनावपूर्ण रहा। इस बीच पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें समझाने की कोशिश की। अंततः समिति की ओर से पंडाल में स्थापित प्रतिमा को पर्दे से ढक दिया गया। इसके बाद हिंदू संगठनों ने अपना विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया और धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी।
देर रात बजाए गए गानों पर भी आपत्ति
संगठनों ने केवल प्रतिमा पर ही नहीं, बल्कि पंडाल में हो रही गतिविधियों पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि समिति की ओर से देर रात तक फिल्मी और अशोभनीय गाने बजाए गए, जिससे धार्मिक वातावरण प्रभावित हुआ। इस मामले में आजाद चौक थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया है।
विवाद का कारण – आधुनिकता बनाम परंपरा
स्थानीय संगठनों का कहना है कि गणेश प्रतिमा का स्वरूप भक्तिभाव और परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए। उनका आरोप है कि AI प्रतिमा बनाकर भगवान के स्वरूप के साथ खिलवाड़ किया गया है, जो आस्था से खिलवाड़ के समान है। संगठनों ने यह भी कहा कि इस तरह के प्रयोग धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुँचाते हैं।
दूसरी ओर समिति के समर्थकों का मानना है कि यह प्रतिमा आधुनिक तकनीक और कला का एक प्रयोग है, जिसे गलत नीयत से नहीं बनाया गया था। उनका कहना है कि प्रतिमा को देखने लोग दूर-दूर से आ रहे थे और इसका उद्देश्य केवल आकर्षण बढ़ाना था, न कि धार्मिक भावनाओं को आहत करना।
पुलिस की सख्त निगरानी
हंगामे के दौरान किसी भी तरह की अनहोनी न हो, इसके लिए पुलिस ने कड़ा पहरा रखा। अधिकारी लगातार भीड़ पर नजर रखे हुए थे। चूँकि विवाद लंबा खिंच सकता था, इसलिए प्रशासन ने त्वरित निर्णय लेते हुए प्रतिमा को ढकने का फैसला करवाया। इससे प्रदर्शनकारियों को संतुष्टि मिली और उन्होंने आंदोलन खत्म कर दिया।
आगे की कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि देर रात बजाए गए अशोभनीय गीतों के मामले में जांच की जा रही है। साथ ही गणेश प्रतिमा स्थापना को लेकर भी समिति से पूछताछ की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक आयोजनों में किसी भी प्रकार की अशांति या परंपराओं से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



